हेलमेट कैसे चुनें: ISI मार्क से साइज और फिटिंग तक की सेफ्टी गाइड

दुकान पर हेलमेट के दाम, रंग और डिजाइन सबसे पहले दिखते हैं। पर हेलमेट कैसे चुनें, इसका सीधा जवाब तीन चीजों में है: ISI मार्क, सही साइज और ठीक फिटिंग। इनमें से एक भी गलत हो तो हेलमेट का काम अधूरा रह जाता है। सड़क किनारे बिकने वाले कई हेलमेट में अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन ही नहीं होता। (उपभोक्ता मामले विभाग, 2025)

इस लेख में क्रम से: ISI मार्क और BIS लाइसेंस की जांच, हेलमेट के प्रकार, साइज नापने का तरीका, फिटिंग की खुद जांच, हेलमेट कब बदलें और 5 आम गलतियां।

ये जानकारी कहां से आई है
कानून और ISI की जानकारी लोकसभा के उत्तर (3 दिसंबर 2025), उपभोक्ता मामले विभाग और BIS की सामग्री से ली गई है। साइज और फिटिंग की सलाह राइडिंग-गाइड्स और रिटेल साइट्स (Autoparts Pro, SlashGear, The Arsenale, Carpuride) से है, जिनमें कई विदेशी हैं। सीमा: फिटिंग की सलाह सामान्य है और हर कंपनी का साइज चार्ट अलग होता है। अपने हेलमेट के मैनुअल की बात इन सबसे ऊपर मानिए।

त्वरित जवाब

क्या देखेंकैसे
ISI मार्क और BIS लाइसेंसहेलमेट पर निशान देखें, BIS Care App में निर्माता जांचें
प्रकारफुल-फेस सबसे ज्यादा कवरेज देता है
साइजसिर की गोलाई नापें, उसी मॉडल का चार्ट देखें
फिटिंगपहनकर सिर हिलाएं, स्ट्रैप के नीचे एक उंगली की जगह
कब बदलेंकिसी भी झटके के बाद, और निर्माता की बताई अवधि पर

पहली जांच: ISI मार्क और BIS लाइसेंस

भारत में दोपहिया के लिए वही हेलमेट सही है जिस पर ISI मार्क (IS 4151:2015) हो। सड़क मंत्रालय के 1 जून 2021 के आदेश से ये अनिवार्य है। (लोकसभा उत्तर, दिसंबर 2025)

बिना सर्टिफिकेशन के हेलमेट बनाना या बेचना BIS Act, 2016 के तहत अपराध है, और सजा में 2 साल तक की कैद भी शामिल है।

सिर्फ निशान देखना काफी नहीं। नकली ISI मार्क की शिकायतें भी आई हैं, इसलिए निर्माता का लाइसेंस BIS Care App या BIS पोर्टल पर जांचिए। शिकायत भी वहीं दर्ज हो सकती है। (उपभोक्ता मामले विभाग, 2025) बिना ISI मार्क वाला हेलमेट सड़क किनारे से मत खरीदिए। कुछ मामलों में बाइक के साथ मुफ्त मिलने वाला हेलमेट भी बिना सर्टिफिकेशन का निकलता है, इसलिए उस पर भी मार्क देखिए।

हेलमेट के प्रकार: कौन सा किसके लिए

सबसे ज्यादा कवरेज फुल-फेस देता है।

प्रकारक्या ढकता हैध्यान रखने की बात
फुल-फेसपूरा सिर, चेहरा और ठुड्डीकवरेज सबसे ज्यादा। हवा के रास्ते और विज़र की हालत जांचें
ओपन-फेससिर और कान, चेहरा खुलाठुड्डी और चेहरे की सुरक्षा नहीं
मॉड्यूलर (फ्लिप-अप)आगे का हिस्सा ऊपर उठता हैउठने वाला हिस्सा पूरी तरह लॉक होना चाहिए

हाफ हेलमेट सिर का ऊपरी हिस्सा ही ढकता है। हर प्रकार पर ISI मार्क जरूरी है। गर्मी में पसीने की वजह से कई लोग हेलमेट से बचते हैं, इसलिए रोज के सफर के लिए अच्छे हवा के रास्ते वाला फुल-फेस देखिए। अगर आप ज्यादातर कम दूरी की गली में चलते हैं, तो भी ठुड्डी की सुरक्षा का सवाल वही रहता है।

हेलमेट का साइज कैसे नापें

सिर की गोलाई नापिए और उसी मॉडल के साइज चार्ट से मिलाइए।

लचीले फीते को भौंहों से लगभग 2.5 cm ऊपर, सिर के सबसे चौड़े हिस्से पर घुमाइए। माप सेंटीमीटर में लिख लीजिए। (Autoparts Pro) हर ब्रांड और मॉडल का चार्ट अलग होता है, इसलिए एक ब्रांड का साइज दूसरे में मत मान लीजिए। (The Arsenale) सिर का आकार, यानी गोल या अंडाकार, भी मायने रखता है।

उदाहरण (समझाने के लिए): माप 57 cm आए तो चार्ट में वही साइज देखिए। दो साइज के बीच आए तो दोनों पहनकर परखिए। सिर का माप वजन बदलने से बदल सकता है, इसलिए कुछ साल में दोबारा नापिए।

फिटिंग की खुद जांच

हेलमेट पहनकर सिर घुमाने पर वो सिर के साथ घूमना चाहिए, सिर के ऊपर अलग नहीं। (MotoCentral, SlashGear के हवाले से) ISI मार्क तभी काम का है जब फिटिंग भी सही हो।

  1. स्ट्रैप बांधिए। ठुड्डी और स्ट्रैप के बीच लगभग एक उंगली की जगह रहनी चाहिए।
  2. हेलमेट सीधा बैठे, आगे या पीछे न झुके।
  3. सिर को दाएं-बाएं हिलाइए। हेलमेट के साथ आपकी त्वचा हिले, हेलमेट अलग न फिसले।
  4. कान, गाल या माथे पर दर्द वाला दबाव-बिंदु न हो।
  5. आंखों के सामने का नजारा चौड़ा रहे।

नए हेलमेट के पैड शुरू में दबते हैं, इसलिए कुछ इस्तेमाल के बाद फिट दोबारा जांचिए। (The Arsenale) चश्मा पहनते हैं तो उसे लगाकर देखिए।

हेलमेट कब बदलें

किसी भी तेज झटके या गिरने के बाद तुरंत। और निर्माता की बताई अवधि पर, जो अक्सर लगभग 5 साल बताई जाती है।

झटके के बाद अंदर का फोम बिना बाहर से दिखे क्षतिग्रस्त हो सकता है। (Carpuride) समय के साथ सुरक्षा देने वाली सामग्री भी कमजोर पड़ती है। कंपनी के हिसाब से अवधि 5 से 7 साल तक अलग-अलग बताई गई है। खरीद की तारीख हेलमेट पर या अपने फोन में लिख लीजिए। स्ट्रैप का धागा घिस या उधड़ जाए तो भी हेलमेट बदल दीजिए। अगर आपके मैनुअल में अलग अवधि लिखी है, तो वही मानिए।

खरीदते समय 5 आम गलतियां

  1. सड़क किनारे से बिना ISI मार्क वाला हेलमेट लेना। सिर्फ निशान ही नहीं, लाइसेंस भी जांचिए।
  2. पहनकर देखे बिना खरीदना। ऑनलाइन लेना हो तो उसी मॉडल का साइज चार्ट और ISI की जानकारी देखिए।
  3. पुराने हेलमेट का साइज नए ब्रांड में दोहराना। हर ब्रांड का चार्ट अलग है।
  4. स्ट्रैप ढीला रखना या बांधना ही नहीं। ढीला हेलमेट गिरने पर सिर पर टिका नहीं रहता। (Competitive Cyclist)
  5. गिरने के बाद वही हेलमेट पहनते रहना। दिखने में ठीक हो तब भी बदलिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हेलमेट कैसे चुनें?

ISI मार्क, सिर की गोलाई के हिसाब से साइज और पहनकर सिर हिलाने की जांच। इनमें से एक भी छूटे तो दूसरा हेलमेट देखिए।

क्या ऑनलाइन हेलमेट खरीदना ठीक है?

तभी, जब उसी मॉडल का साइज चार्ट और ISI की जानकारी दी हो। कुछ स्टोर सुरक्षा कारणों से हेलमेट वापस नहीं लेते, इसलिए रिटर्न की शर्तें पहले पढ़ लीजिए।

क्या विदेशी DOT या ECE वाला हेलमेट भारत में चलेगा?

ISI मार्क की जगह नहीं ले सकता। दोपहिया हेलमेट के लिए IS 4151:2015 वाला ISI मार्क ही जरूरी बताया गया है।

निष्कर्ष

सवाल “कौन सा हेलमेट सबसे अच्छा” का नहीं, “कौन सा आपके सिर पर सही बैठता है” का है। ISI मार्क और लाइसेंस पहली शर्त हैं, साइज और फिटिंग दूसरी। दुकान पर पहनकर, स्ट्रैप बांधकर और सिर हिलाकर देखे बिना हेलमेट मत लीजिए। और हेलमेट पर खरीद की तारीख लिखकर रखिए, ताकि बदलने का समय याद रहे।

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