दो कोटेशन आए हैं, एक दूसरे से ₹2,000 सस्ता। पर क्या दोनों में आपको वही चीज़ मिल रही है? कार इंश्योरेंस कैसे चुनें, इसका जवाब सस्ते कोटेशन पर नहीं, इस पर टिका है कि थर्ड-पार्टी का हिस्सा सबका एक जैसा तय होता है, इसलिए असली फर्क बाकी 5 बातों में छिपा है।
इस लेख में वे 6 बातें हैं: थर्ड-पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव, IDV, NCB, ऐड-ऑन, मालिक-चालक का एक्सीडेंट कवर और रिन्यूअल की तारीख। आखिर में कोटेशन मिलाने के 4 कदम हैं।
ये जानकारी कहां से आई है: आंकड़े भारत सरकार के 2022 के थर्ड-पार्टी नियमों और IRDAI के 2018 के सर्कुलर पर आधारित रिपोर्टों, और बीमा कंपनियों व वित्तीय साइटों के पेजों से हैं (अक्टूबर 2026)। IRDAI की अपनी साइट नहीं खुली, इसलिए अंतिम पुष्टि के लिए अपने बीमाकर्ता की पॉलिसी शर्तें देखिए। यह वित्तीय सलाह नहीं, जानकारी है।
1. थर्ड-पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव
थर्ड-पार्टी बीमा दूसरों को हुए नुकसान, जैसे चोट, मौत या संपत्ति के नुकसान की भरपाई करता है, आपकी अपनी गाड़ी की मरम्मत की नहीं। कॉम्प्रिहेंसिव में थर्ड-पार्टी के साथ आपकी गाड़ी का नुकसान भी शामिल होता है।
थर्ड-पार्टी प्रीमियम सरकार तय करती है। 2022 के नियमों में निजी कार के लिए यह 1000 cc तक ₹2,094, 1000 से 1500 cc तक ₹3,416 और 1500 cc से ऊपर ₹7,897 सालाना है। जुलाई 2026 के एक पेज के मुताबिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, पर वह अब तक अधिसूचित नहीं हुआ, इसलिए यह आंकड़ा बदल सकता है।
मतलब यह कि अलग-अलग कंपनियों में कीमत का फर्क सिर्फ अपनी गाड़ी वाले हिस्से में आता है। बहुत पुरानी और कम कीमत की गाड़ी में कई लोग सिर्फ थर्ड-पार्टी रखते हैं, पर तब अपनी गाड़ी की मरम्मत का खर्च खुद उठाना पड़ता है।
2. IDV: बीमे की रकम सही रखिए
IDV वह अधिकतम रकम है जो चोरी या पूरी तबाही पर मिल सकती है। यह गाड़ी की कीमत में से उम्र के हिसाब से कटौती करके निकलती है।
| गाड़ी की उम्र | कटौती |
|---|---|
| 6 महीने तक | 5% |
| 6 महीने से 1 साल | 15% |
| 1 से 2 साल | 20% |
| 2 से 3 साल | 30% |
| 3 से 4 साल | 40% |
| 4 से 5 साल | 50% |
| 5 साल से ऊपर | बीमाकर्ता और आपकी सहमति से |
उदाहरण के लिए, ₹8 लाख की कार 2 से 3 साल की हो, तो IDV लगभग ₹5.6 लाख बनती है (यह सिर्फ उदाहरण है)। प्रीमियम घटाने के लिए IDV कम रखना जोखिम है, क्योंकि चोरी पर उतनी ही रकम मिलेगी। बहुत ज़्यादा IDV रखने पर प्रीमियम बढ़ता है, पर नुकसान के समय बीमाकर्ता बाज़ार भाव ही देता है।
3. NCB: क्लेम न करने का इनाम
पॉलिसी के लगातार क्लेम-मुक्त सालों पर आपके अपनी-गाड़ी वाले प्रीमियम में छूट मिलती है: 1 साल पर 20%, 2 साल पर 25%, 3 साल पर 35%, 4 साल पर 45% और 5 साल या ज़्यादा पर 50%। यह सिर्फ अपनी गाड़ी वाले प्रीमियम पर लगती है, थर्ड-पार्टी पर नहीं।
एक क्लेम करते ही अगले रिन्यूअल पर NCB शून्य हो जाता है, चाहे आप कितने ऊंचे स्लैब पर हों। मान लीजिए आपका अपनी-गाड़ी वाला प्रीमियम ₹10,000 है और 50% NCB है। तब आप ₹5,000 बचा रहे हैं, और एक छोटे क्लेम से यह बचत मिट जाती है।
इसलिए क्लेम से पहले मरम्मत का खर्च और आगे के सालों की छूट, दोनों जोड़कर देखिए। NCB आपका है, गाड़ी का नहीं। कार बदलें या बीमाकर्ता, तो NCB ट्रांसफर सर्टिफिकेट पहले ले लीजिए। कुछ बीमाकर्ता NCB प्रोटेक्टर ऐड-ऑन भी देते हैं, जिसकी शर्तें अलग होती हैं।
4. ऐड-ऑन: कौन सा आपके लिए ज़रूरी है
इस लेख के स्रोतों में ऐड-ऑन की कीमतों के पक्के आंकड़े नहीं मिले, इसलिए नीचे सिर्फ यह देखिए कि कौन सा किस स्थिति में काम आता है।
- ज़ीरो डिप्रीशिएशन: आम तौर पर क्लेम में पुर्ज़ों की घिसावट की कटौती घटाता है। नई गाड़ी के लिए ज़्यादा काम का है, पुरानी में कम।
- इंजन प्रोटेक्शन: जलभराव वाले इलाकों में काम का है, जहां पानी से इंजन खराब होने का खतरा रहता है।
- रोडसाइड असिस्टेंस: लंबी यात्रा करने वालों के लिए उपयोगी है।
हर ऐड-ऑन की “क्या शामिल नहीं है” वाली सूची ज़रूर पढ़िए, क्योंकि शर्तें कंपनी के हिसाब से अलग होती हैं।
5. मालिक-चालक का पर्सनल एक्सीडेंट कवर
IRDAI ने 2018 के सर्कुलर में मालिक-चालक का न्यूनतम कवर ₹15 लाख कर दिया, जिसका सालाना प्रीमियम ₹750 बताया गया। इससे पहले निजी कार में यह ₹2 लाख था। ₹15 लाख से ऊपर का कवर वैकल्पिक है और अलग से पैसे लगते हैं।
यह प्रीमियम पुराना आंकड़ा है, इसलिए अपनी पॉलिसी में इसकी रकम देखिए। यह कवर सिर्फ मालिक-चालक के लिए है। गाड़ी के बाकी यात्रियों पर यह लागू नहीं होता, इसलिए उनके लिए अलग कवर के बारे में बीमाकर्ता से पूछिए।
6. रिन्यूअल की तारीख: देरी की कीमत
पॉलिसी खत्म होने के बाद 90 दिन से ज़्यादा गुज़रें, तो पूरा जमा NCB खत्म हो जाता है और आप शून्य से शुरू करते हैं। जिस पॉलिसी की अवधि खत्म हो चुकी हो, उस पर गाड़ी चलाना कानूनी जोखिम भी है, क्योंकि थर्ड-पार्टी बीमा ज़रूरी है।
इसलिए रिन्यूअल की तारीख फोन के रिमाइंडर में डाल लीजिए, खत्म होने से कम से कम दो हफ्ते पहले। खत्म हो चुकी पॉलिसी के दौरान हुआ नुकसान बीमा से बाहर रहेगा, इसलिए यह देरी महंगी पड़ सकती है।
कार इंश्योरेंस कैसे चुनें: कोटेशन मिलाने के 4 कदम
- सभी कोटेशन में IDV बराबर रखिए, वरना सस्ता दिखने वाला कोटेशन सिर्फ कम रकम का बीमा हो सकता है।
- ऐड-ऑन की सूची एक जैसी रखिए।
- थर्ड-पार्टी हिस्सा हटाकर सिर्फ अपनी-गाड़ी वाले प्रीमियम की तुलना कीजिए।
- क्लेम की प्रक्रिया और कैशलेस गैराज की सूची अपने शहर के हिसाब से देखिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कार इंश्योरेंस कैसे चुनें?
पहले तय कीजिए कि थर्ड-पार्टी चाहिए या कॉम्प्रिहेंसिव। फिर सभी कोटेशन में IDV और ऐड-ऑन बराबर रखकर सिर्फ अपनी-गाड़ी वाला प्रीमियम और क्लेम की प्रक्रिया मिलाइए।
क्या छोटा क्लेम करने से NCB चला जाता है?
हां, एक क्लेम पर अगले रिन्यूअल में NCB शून्य हो जाता है। NCB प्रोटेक्टर ऐड-ऑन हो, तो शर्तों के हिसाब से कुछ राहत मिल सकती है।
थर्ड-पार्टी बीमा का प्रीमियम सब कंपनियों में एक जैसा क्यों है?
क्योंकि उसकी दर सरकार तय करती है। इसलिए कंपनियों के बीच कीमत का फर्क सिर्फ अपनी गाड़ी वाले हिस्से में आता है।
निष्कर्ष
इन 6 बातों में से सबसे ज़रूरी यह है कि थर्ड-पार्टी का हिस्सा सबका एक है, इसलिए ₹2,000 सस्ता दिखने वाला कोटेशन कई बार कम IDV या कम ऐड-ऑन का नतीजा होता है। इसलिए पहले IDV बराबर कीजिए, फिर सिर्फ अपनी-गाड़ी वाला प्रीमियम मिलाइए। और रिन्यूअल की तारीख आज ही फोन में डाल लीजिए।