अगर आप पहली बाइक लेने जा रहे हैं, तो ध्यान सबसे पहले कीमत, माइलेज और लुक पर जाता है। पर पहली बाइक खरीदते समय गलतियां अक्सर इनके बाहर होती हैं: ऑन-रोड कीमत, टेस्ट राइड, सर्विस और लोन का हिसाब। इनमें से कोई चूकी, तो महीनों बाद जेब या आराम पर असर दिखता है।
ये हैं वो 6 गलतियां, इसी क्रम में: सिर्फ एक्स-शोरूम कीमत देखना, जरूरत की जगह दिखावा चुनना, टेस्ट राइड छोड़ देना, सर्विस और वारंटी न परखना, लोन का हिसाब न लगाना और डिलीवरी पर जांच न करना। अंत में एक छोटी चेकलिस्ट।
ये जानकारी कहां से आई है
बीमा का नियम IRDAI के सर्कुलर (PTI/Business Standard, अगस्त 2018) से और हेलमेट की अनिवार्यता लोकसभा के उत्तर (दिसंबर 2025) से। ऑन-रोड कीमत, टेस्ट राइड, लोन और डिलीवरी की सलाह Shriram Finance, PolicyBazaar, ICICI Lombard, Zurich Kotak और Bajaj General Insurance के गाइड्स से। सीमा: ये ज्यादातर बीमा और फाइनेंस कंपनियों के गाइड हैं, जिनका अपना कारोबार बीमा और लोन बेचना है। गणनाएं अलग से की गई हैं।
गलती 1: सिर्फ एक्स-शोरूम कीमत देखना
ऑन-रोड कीमत एक्स-शोरूम से ज्यादा होती है। उसमें रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स और बीमा जुड़ते हैं। एक्सेसरीज, एक्सटेंडेड वारंटी और लोन की प्रोसेसिंग फीस भी जुड़ सकती है।
बीमा पर खास ध्यान दीजिए। सितंबर 2018 से नई दोपहिया पर 5 साल का थर्ड-पार्टी बीमा जरूरी है। कोटेशन में पूछिए कि पैकेज कौन सा है: 5 साल का थर्ड-पार्टी, 5 साल का पूरा पैकेज, या 5 साल थर्ड-पार्टी के साथ 1 साल का ओन-डैमेज।
दो-तीन डीलर से लिखित ऑन-रोड कोटेशन लीजिए और तुलना उसी रकम से कीजिए। बजट में ISI मार्क वाला हेलमेट भी जोड़िए, जो 2021 से अनिवार्य है। (लोकसभा उत्तर, दिसंबर 2025) ऑन-रोड कोटेशन लिखित में लिए बिना बुकिंग मत कीजिए। रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन राज्य के हिसाब से अलग हैं, इसलिए दूसरे शहर के दोस्त की बताई कीमत आपके काम की नहीं।
गलती 2: जरूरत की जगह दिखावा चुनना
बाइक अपने रोज के इस्तेमाल के हिसाब से चुनिए, लुक या पावर के हिसाब से नहीं। रोज शहर के ट्रैफिक में चलना है तो किफायती कम्यूटर बाइक ठीक है, और अक्सर लंबे सफर पर जाना है तो टूरिंग।
ज्यादा पावर पहली बाइक के लिए हमेशा बेहतर नहीं। गलत पावर चुनने पर सवारी जानलेवा भी हो सकती है, इसलिए वही पावर लीजिए जिसे संभाल सकें।
माइलेज और पावर का फैसला इस पर टिका है कि रोज कितना चलते हैं और महीने में पेट्रोल पर कितना खर्च कर सकते हैं। समझाने के लिए गणना: रोज 40 km, 365 दिन, पेट्रोल ₹100/L। 45 km/l वाली बाइक साल में लगभग 324 L और 55 km/l वाली लगभग 265 L पीती है। फर्क लगभग 59 L, यानी साल में लगभग ₹5,900। रोज 10 km चलते हैं तो यही फर्क लगभग ₹1,500 रह जाता है।
गलती 3: टेस्ट राइड छोड़ देना
बिना टेस्ट राइड के बाइक मत खरीदिए। स्पेसिफिकेशन शीट आराम और संतुलन नहीं बताती। टेस्ट राइड में बैठने की मुद्रा, सीट का आराम, हैंडल की स्थिति, वजन और संतुलन, ब्रेक, गियर बदलना, सस्पेंशन और ट्रैफिक में चलाना परखिए।
कम कद या कम वजन वाले राइडर के लिए नीची सीट और हल्की बाइक बेहतर रहती है। रुकने पर दोनों पैर जमीन पर टिकाकर देखिए और बाइक को सीधा खड़ा करके उसका वजन महसूस कीजिए। अगर डीलर के पास आपकी पसंद की बाइक का डेमो नहीं है, तो किसी मालिक से बैठकर देखने की इजाजत मांगिए।
गलती 4: सर्विस और वारंटी न परखना
अपने घर और दफ्तर के पास ब्रांड का सर्विस सेंटर देखिए। ये उन चीजों में से है जिन्हें पहली बार खरीदने वाले अक्सर नजरअंदाज करते हैं।
सर्विस का औसत खर्च लगभग ₹1,000 से 3,000 प्रति सर्विस बताया गया है। (Bajaj General Insurance) समझाने के लिए गणना: साल में 4 पेड सर्विस हों (Hero के 90 दिन वाले उदाहरण से) तो ₹4,000 से ₹12,000।
वारंटी की शर्तें लिखित में लीजिए: कितने साल, कितने km, और सर्विस किस अधिकृत सर्विस सेंटर से जरूरी है। नया ब्रांड हो तो नेटवर्क कम हो सकता है, तब दूरी और ज्यादा मायने रखती है।
गलती 5: लोन का हिसाब न लगाना
कम EMI का मतलब सस्ती बाइक नहीं होता। ज्यादातर कर्जदाता ऑन-रोड कीमत का 95% तक देते हैं, और कुछ 100% तक का दावा करते हैं।
समझाने के लिए गणना: लोन ₹80,000 और ब्याज 12% सालाना मानकर। 24 महीने में EMI ₹3,766 और कुल ब्याज लगभग ₹10,381। 36 महीने में EMI ₹2,657 (₹1,109 कम), पर कुल ब्याज लगभग ₹15,657, यानी ₹5,276 ज्यादा। 12% सिर्फ उदाहरण है, आपकी असली दर अलग होगी।
आप सोच रहे होंगे कि कम डाउन पेमेंट ही आसान रास्ता है? ज्यादा डाउन पेमेंट से लोन की रकम और कुल ब्याज, दोनों घटते हैं। असली ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और फोरक्लोजर की शर्तें बैंक से लिखित में लीजिए। EMI घटाने के लिए ही लंबा कार्यकाल मत चुनिए।
गलती 6: डिलीवरी पर जांच न करना
डिलीवरी से पहले बाइक और कागज दोनों जांचिए। इनवॉइस, इंजन नंबर और चेसिस नंबर आपस में मिलने चाहिए। बीमा का कवर-नोट आपके नाम और सही नंबर के साथ हो, डीलर के रजिस्ट्रेशन भेजने से पहले।
बाइक में ओडोमीटर लगभग शून्य हो। इंजन आसानी से स्टार्ट हो, कोई असामान्य आवाज, धुआं या तेल का रिसाव न हो। मैनुअल, सर्विस बुकलेट और बैटरी का वारंटी कार्ड मिले।
कागज में डीलर का टैक्स इनवॉइस, सेल सर्टिफिकेट (फॉर्म 21), फॉर्म 22 और अस्थायी रजिस्ट्रेशन होने चाहिए। अस्थायी रजिस्ट्रेशन करीब 30 दिन चलता है, और स्मार्ट-कार्ड RC कुछ हफ्तों में घर आता है। लोन पर बाइक है तो फॉर्म 34 भी लगता है।
पहली बाइक खरीदते समय गलतियां टालने की चेकलिस्ट
- लिखित ऑन-रोड कोटेशन और बीमा का पैकेज मिल गया?
- रोज के km और रास्ते के हिसाब से बाइक चुनी?
- टेस्ट राइड में सीट, वजन, ब्रेक और गियर परखे?
- घर के पास सर्विस सेंटर और वारंटी की शर्तें देखीं?
- EMI, ब्याज दर और कुल ब्याज का हिसाब निकाला?
- डिलीवरी पर नंबर, कागज और बाइक की जांच की?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पहली बाइक खरीदते समय क्या ध्यान रखें?
ऑन-रोड कीमत, रोज का इस्तेमाल, टेस्ट राइड, सर्विस सेंटर, लोन का कुल ब्याज और डिलीवरी की जांच। ऊपर की 6 गलतियां इन्हीं की सूची हैं।
क्या बाइक खरीदने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी है?
खरीदने और रखने के लिए नहीं, पर चलाने के लिए जरूरी है। लाइसेंस के बिना बाइक सड़क पर मत ले जाइए।
फ्री हेलमेट मिले तो क्या ISI मार्क देखना जरूरी है?
हां। दोपहिया हेलमेट पर ISI मार्क (IS 4151:2015) 2021 से अनिवार्य है। (लोकसभा उत्तर, दिसंबर 2025)
निष्कर्ष
इन 6 गलतियों में से कोई भी एक सवाल या एक कागज से टल सकती है। इस हफ्ते तीन काम कीजिए: दो डीलर से लिखित ऑन-रोड कोटेशन लीजिए, पसंद की बाइक की टेस्ट राइड कीजिए, और EMI का कुल ब्याज निकाल लीजिए। डिलीवरी वाले दिन इंजन-चेसिस नंबर और कागज मिलाना मत भूलिए।