पेट्रोल, डीज़ल या CNG कार कौन सी बेहतर है? रोज़ के km से तय करें

अगर आप नई कार लेने जा रहे हैं और पेट्रोल, डीज़ल और CNG में उलझे हैं, तो पेट्रोल, डीज़ल या CNG कार कौन सी बेहतर है, इसका जवाब ईंधन के भाव में नहीं, आपके रोज़ के किलोमीटर में छिपा है। कम चलाने वाले के लिए सस्ता ईंधन भी महंगा सौदा बन सकता है, क्योंकि कार की ऊपर की कीमत वसूल होने में सालों लग जाते हैं।

इस आर्टिकल में आपको 3 चीज़ें मिलेंगी: तीनों ईंधन के लिए वसूली का हिसाब (ऊपर की कीमत कितने महीने में निकलेगी), पेट्रोल, डीज़ल और CNG में से हर एक किसके लिए सही है, और खरीदने से पहले अपने शहर की 3 जांचें।

ये जानकारी कहां से आई है: ये आर्टिकल बुनियादी गणित और तीनों ईंधन की जानी-पहचानी खूबियों और कमियों पर आधारित है। ईंधन के भाव, माइलेज और कार की कीमत के फर्क समझाने के लिए मान्यताएं हैं। इन्हें [कंपनी की आधिकारिक साइट: नाम, महीना साल] और [अपने शहर का ईंधन भाव: स्रोत, महीना साल] से बदलकर देखें। हमने किसी कार पर खुद टेस्ट नहीं किया है।

रोज़ के km: फैसला यहीं से शुरू होता है

ईंधन चुनने का सबसे बड़ा आधार आपका महीने का किलोमीटर है, क्योंकि डीज़ल और CNG मॉडल की कीमत ज़्यादा होती है और उसे सस्ते ईंधन से धीरे-धीरे वसूलना पड़ता है।

आप सोच रहे होंगे, मैं तो रोज़ शहर में ही चलाता हूं, फिर भी CNG लूं? ये आपके km पर टिका है। नीचे के उदाहरण में महीने में 300 km (रोज़ लगभग 10 km) चलाने वाले की CNG की वसूली लगभग 112 महीने, यानी 9 साल से ऊपर खिंचती है।

आपके लिए इसका मतलब: पहले अपना km लिखें, फिर ईंधन चुनें। कब लागू नहीं होता: अगर आपको सिर्फ सुविधा या ताकत चाहिए और खर्च की चिंता नहीं, तो ये हिसाब ज़रूरी नहीं।

वसूली का हिसाब: ऊपर की कीमत कितने महीने में निकलेगी

समझाने के लिए उदाहरण (मान्यताएं: पेट्रोल ₹100/L पर 18 km/l, डीज़ल ₹90/L पर 22 km/l, CNG ₹75/kg पर 26 km/kg, डीज़ल मॉडल पेट्रोल से ₹1.2 लाख और CNG मॉडल ₹90,000 महंगा):

  • प्रति km खर्च: पेट्रोल ₹5.56, डीज़ल ₹4.09, CNG ₹2.88
  • पेट्रोल के मुकाबले प्रति km बचत: डीज़ल ₹1.46, CNG ₹2.67
महीने के kmपेट्रोल का ईंधन खर्चडीज़लCNGडीज़ल का फर्क वसूल होगाCNG का फर्क वसूल होगा
500₹2,778₹2,045₹1,442लगभग 164 महीनेलगभग 67 महीने
1,000₹5,556₹4,091₹2,885लगभग 82 महीनेलगभग 34 महीने
1,500₹8,333₹6,136₹4,327लगभग 55 महीनेलगभग 23 महीने
2,000₹11,111₹8,182₹5,769लगभग 41 महीनेलगभग 17 महीने

आपके लिए इसका मतलब: 1,000 km महीने पर CNG का फर्क लगभग 34 महीने में निकलता है और डीज़ल का लगभग 82 महीने में। ये भाव और कीमतें आपके शहर और मॉडल पर बदलेंगी, इसलिए इन्हें अपनी संख्या से दोबारा निकालें। इस हिसाब में सर्विस, बीमा और रीसेल का फर्क शामिल नहीं है।

कब लागू नहीं होता: अगर आप कार 3 साल में बदल देते हैं, तो इस उदाहरण में डीज़ल का फर्क 1,000 km महीने पर वसूल ही नहीं होगा।

पेट्रोल: कम km और कम झंझट वालों के लिए

अगर आप महीने में 500 km या उससे कम चलाते हैं, तो उदाहरण में डीज़ल और CNG की वसूली 5 साल से ऊपर जाती है। ऐसे में पेट्रोल का कम दाम और सीधा रखरखाव बेहतर बैठता है।

पेट्रोल कार की ऊपर की कीमत तीनों में कम है (उदाहरण की मान्यता के हिसाब से), और उसमें CNG के सिलेंडर या डीज़ल के प्रदूषण-फिल्टर जैसी अलग चीज़ें नहीं हैं। कमी: रनिंग खर्च तीनों में ज़्यादा। 1,000 km महीने पर उदाहरण में पेट्रोल ₹5,556 बनाम CNG ₹2,885।

कब लागू नहीं होता: अगर आप महीने में 1,500 km से ऊपर चलाते हैं, तो पेट्रोल का ज़्यादा ईंधन खर्च जल्दी भारी पड़ने लगता है।

डीज़ल: ज़्यादा km और हाईवे वालों के लिए

डीज़ल तब समझदारी है जब आप महीने में 1,500 km या उससे ज़्यादा चलाते हैं और ज़्यादातर हाईवे पर। डीज़ल इंजन कम रफ़्तार पर ज़्यादा खिंचाव (टॉर्क) देता है, इसलिए पूरी सवारी और सामान के साथ हाईवे पर चलना आसान लगता है।

आप सोच रहे होंगे, डीज़ल का ईंधन सस्ता और माइलेज ज़्यादा, तो डीज़ल हमेशा बेहतर? उदाहरण में डीज़ल पेट्रोल से ₹1.46/km सस्ता है, पर CNG से ₹1.21/km महंगा। यानी डीज़ल की जीत पेट्रोल पर है, CNG पर नहीं।

ध्यान रखें: कार की कीमत ऊपर रहती है, और कई BS6 डीज़ल कारों में डीज़ल पार्टिकुलेट फिल्टर (DPF) होता है, जिसे समय-समय पर लंबी ड्राइव चाहिए, इसलिए सिर्फ छोटी शहरी ड्राइव में दिक्कत आ सकती है। कुछ शहरों में पुराने डीज़ल वाहनों पर पाबंदी के नियम रहे हैं और ये बदलते रहते हैं, इसलिए अपने शहर में पुष्टि करें।

कब लागू नहीं होता: अगर आपकी ज़्यादातर ड्राइव छोटी शहरी दूरी की है, तो डीज़ल मुश्किल से फायदा देगा।

CNG: शहर में ज़्यादा km वालों के लिए

CNG तीनों में सबसे सस्ता चलता है: उदाहरण में ₹2.88 प्रति km। ज़्यादा km पर इसकी ऊपर की कीमत जल्दी निकलती है, जैसे 1,500 km महीने पर लगभग 23 महीने में।

कमियां: बूट में सिलेंडर की जगह कम बचती है, ताकत थोड़ी कम होती है, और भराई के लिए पंप की दूरी और कतार का ध्यान रखना पड़ता है। कंपनी-फिटेड CNG चुनें, क्योंकि बाद में लगवाई किट से वारंटी और सुरक्षा के सवाल आ सकते हैं।

आपके लिए इसका मतलब: आपकी ज़्यादातर चलाई शहर में है और रास्ते में CNG पंप है, तो ये सबसे ज़्यादा बचत देता है। कब लागू नहीं होता: अगर पंप आपके रोज़ के रास्ते से हटकर दूर पड़ता है, तो बचत भराई की भागदौड़ में खो सकती है।

खरीदने से पहले अपने शहर की 3 जांचें

  1. CNG पंप: आपके घर और रोज़ के रास्ते के पास कितनी दूरी पर है, और भीड़ के समय कतार कैसी रहती है।
  2. डीज़ल के नियम: आपके शहर में पुराने डीज़ल वाहनों पर कोई पाबंदी या नया नियम है या नहीं, ये अपने परिवहन विभाग से पूछें।
  3. सर्विस: उस ईंधन वाली कार की सर्विस और पुर्ज़ों की सुविधा आपके शहर में कहां है। डीलर से सर्विस का खर्च लिखित में मांगें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या CNG कार से हाईवे की लंबी यात्रा हो सकती है?

हां, पर रूट के CNG पंप पहले से देख लें, क्योंकि रास्ते में उनकी उपलब्धता बदलती है। ज़्यादातर कंपनी-फिटेड CNG कारों में पेट्रोल का टैंक भी रहता है, जो बैकअप देता है। अपने मॉडल में इसकी पुष्टि करें।

तीनों में रीसेल किसकी बेहतर होती है?

इसका तय जवाब मेरे पास नहीं है, क्योंकि ये मॉडल, शहर और नियमों पर निर्भर करता है। अपने शहर के सेकंड-हैंड डीलर से उसी मॉडल के तीनों ईंधन की रीसेल कीमत पूछें।

क्या EV या हाइब्रिड को भी इस तुलना में रखना चाहिए?

अगर घर पर चार्जिंग की जगह है, तो हां, पर उसका हिसाब अलग है। ये आर्टिकल सिर्फ पेट्रोल, डीज़ल और CNG की तुलना है।

निष्कर्ष

सवाल ये नहीं कि कौन सा ईंधन सस्ता है, बल्कि ये कि आप कितना चलाते हैं: रोज़ के km ही तय करते हैं कि पेट्रोल, डीज़ल या CNG में कौन सी कार आपके लिए बेहतर है। उदाहरण में 1,000 km महीने पर CNG का फर्क लगभग 34 महीने में और डीज़ल का लगभग 82 महीने में वसूल होता है। पिछले महीने का असली km लिखें, तालिका अपने भाव से भरें, फिर फैसला करें।

You cannot copy content of this page